मेरी आत्मकथा -खुल्लम खुल्ला

सत्यमेव जयते पार्ट -2

कुछ समय पहले आमिर खान ने सत्यमेव जयते पार्ट -2 सीरियल के माध्यम से स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रही कुरीतियों को उजागर किया था। लोगों में जागरूकता की एक नई लहर दौड़ गई। ऐसा प्रतीत हुआ कि लोग स्वयं को इस प्रकार की धोखाधड़ी और कुरीतियों से बचा सकेंगे। परन्तु ऐसा कुछ नहीं हुआ, बल्कि स्वास्थ्य प्रणाली और भी बद से बत्तर होती चली जा रही है। सत्यमेव जयते में जब यह बताया गया कि डॉक्टर बहुत सारे अनावश्यक टेस्ट लिखते हैं, जिनका बीमारी से कोई संबंध नहीं होता और सभी टेस्ट में लगभग 50% का कमीशन लेते हैं, तो जनता तिलमिला गई। परन्तु समय के साथ उन विचारों पर धूल जम गई और स्वास्थ्य प्रणाली कुरीतियों, धोखाधड़ी और गुनाहों की कड़ी में और आगे बढ़ गयी।

पिछले एक साल में कई ऐसे वाकिये सामने आये हैं, जहाँ जाँचों में जानबूझकर मरीज के लक्षणों से हटकर रिजल्ट दिखाये गये हैं। एक लैब से दूसरी लैब की रिपोर्ट में 24 घंटे के अंतराल में जमीन-आसमान का फर्क देखने को मिलता है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि अधिकांश डॉक्टर उसी लैब की रिपोर्ट को तवज्जो देते हैं जहाँ से उनका कमीशन बंधा होता है। कमीशन तक तो किसी तरह बर्दाश्त किया जा सकता है, परन्तु अब जो हो रहा है, वह बहुत ही घिनौना है। आजकल डॉक्टर सोची हुई बीमारी के अनुरूप लैब से रिपोर्ट तैयार करवाते हैं। उसके बाद मरीज की समस्या के साथ डॉक्टर द्वारा बनाई गयी समस्या का भी इलाज शुरू हो जाता है। दवायें खाने से कुछ समय बाद लक्षणों में आराम दिखाई देता है, परन्तु थोड़े ही समय बाद नई और पहले से ज़्यादा गंभीर समस्यायें दिखाई देने लगती हैं। इस तरह की शारीरिक समस्यायों को इंजेक्टेड या जनरेटेड समस्यायें कहा जाता है, क्योंकि ये समस्यायें बीमार के शरीर में पहले नहीं थीं।

पहले लोग डॉक्टर के पास बीमारी दूर करने के लिये जाते थे, परन्तु अब बीमारीे पैदा करवाने जाते हैं। आज रक्षक ही भक्षक बन गया है। समझ नहीं आता कि क्या होने वाला है? क्या इन चीजों को कोई नियम कानून रोक पायेगा? क्या बीमार व्यक्ति को कभी भी सही रिपोर्ट मिल पायेगी, जिस पर विश्वास कर उसका उचित इलाज हो सकेगा? स्वास्थ्य इतिहास के इस नर्क तुल्य समय का कब अंत होगा? आज दुनिया में स्वास्थ्य सबसे अधिक करप्शन वाला विभाग बन गया है।

समझ नहीं आ रहा, कि ऐसी परिस्थिति में आपको क्या सलाह दूँ। पहले सोचा कि आपको सलाह दूँगा एक रिपोर्ट पर विश्वास ना करें और दूसरी जगह से एक और रिपोर्ट करवायें और दोनों रिपोर्ट के कम्पेयर करें। परन्तु दूसरी लैब की रिपोर्ट सही होगी, इसकी क्या उम्मीद है। इसके अलावा बहुत से लोगों के पास एक बार टेस्ट करवाने के लिये पैसा नहीं है, भला बार-बार रिपोर्ट की सच्चाई जानने के लिये कहाँ से पैसे लायेंगे। अतः स्वयं को ऐसी परिस्थितियों से बचाने के लिए, बिना बौखलाए हुये धैर्य से काम लें, किसी से जाँच का निष्पक्ष आंकलन करवायें। आवश्यकता समझें तो ज़ायरोपैथी से परामर्श करें।

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