मेरी आत्मकथा -खुल्लम खुल्ला

मेरी आत्मकथा -खुल्लम खुल्ला

बहुत दिनों से हमारे बारे में कुछ लोग अफवाहें फैलाकर, गलतफहमी पैदा कर रहें हैं। पहले सोचा कि कोई बात नहीं, समय के साथ सबको समझ आ जायेगा। परन्तु, लगा कि कौन समझायेगा और क्यों?

इसके अलावा हमारे बहुत से शुभचिंतक और चाहने वाले लगातार कुछ लोंगों द्वारा किये जा रहे नकारात्मक और गलतफहमी पैदा करने वाली विचारधारा से हमें निरंतर अवगत करा रहे थे।

फिर सोचा कि हमारी सच्चाई हमारे अलावा कौन बता पायेगा, इसलिये लिखने बैठ गया।

मेरा सभी से अनुरोध है कि एक बार अवश्य पढें और यदि मानव कल्याण हेतु आवश्यक समझें तो ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर कर स्वयं को इस मुहिम का पात्र बना लें।

कल मेरे पास एक बहुत ही सुलझे और समझदार लीडर आये। वे हमारे साथ लगभग आठ वर्षों से जुड़े हैं। उन्होंने आते ही पूछा कि नरेश जी, ये मैं क्या सुन रहा हूँ, कि अब आपने अपने सप्लीमेंट बनवा लिये हैं और इसके अलावा आप अन्य कंपनियों के सप्लीमेंट की भी सलाह दे रहें हैं? हमनें तो सोचा था कि आप सिर्फ एमवे के ही सप्लीमेंट की सलाह देते हैं। इस बात से हमारी सभी डाउनलाइन और अपलाइन नाराज हैं।  लोग बातें कर रहें हैं कि नरेश जी लालची हो गये हैं। मुझसे यह सहन नहीं हुआ तो सीधे आपसे पूछने चला आया। इस तरह से पेशेन्ट के बीच में धुसकर आपसे बात करने का दु:साहस करने के लिए मुझे क्षमा करियेगा। समझ नहीं आ रहा कि कैसे उन्हें समझाऊँ कि यह सच नहीं है।

वैसे तो पेशेन्ट देखते समय मैं किसी भी प्रकार के व्यवधान को प्रोत्साहित नहीं करता। परन्तु उनकी सहजता, सरलता और निश्छलता को देखते हुये  मैंने उनसे बैठने का आग्रह किया।

मैंने उन्हें बताया कि यह सच्चाई है कि हमनें अपने सप्लीमेंट बनवाये हैं और कुछ अन्य कंपनियों के भी सप्लीमेंट का सुझाव दे रहे हैं। परन्तु इसके अलावा अन्य बातें निराधार और मनगढ़ंत हैं।

क्या आपको याद है कि आज से लगभग आठ साल पहले आप एक ब्लड कैंसर के पेशेन्ट को लेकर मेरे सरकारी निवास स्थान, चाणक्यपुरी आये थे। आपने बताया था कि, एम्स ने कहा है कि, इनके शरीर में खून नहीं बन रहा, ले जाओ, जब तक जिन्दा हैं, इनकी सेवा करो। मैंने बहुत सारे सप्लीमेंट लिखे थे, जिन्हें देखकर आप हैरत में पड़ गये थे। आपने यह भी कहा था कि इतना खाकर कोई जियेगा या मरेगा। मैंने आपको विश्वास दिलाया था कि दूसरों का तो नहीं पता, परन्तु यदि सुझाये गये सप्लीमेंट इन्होंने खाये तो ये अवश्य जीवित रहेंगे और जहाँ तक मुझे खबर है, वे आज भी जीवित हैं। आप तो मात्र उन्हें एक डेली खिला रहे थे और मैंने लगभग 45 गोलियाँ लिखीं थीं, जिसमें 6 डेली सम्मिलित थीं। मैंने अपने अनुभव, सूझबूझ और ज्ञान से वह सुझाव दिया था जिससे पेशेन्ट स्वस्थ हो जाये और आपने भी सुझाये गये सप्लीमेंट सिर्फ़ इसलिये खिलाये थे कि आपका भी उदेश्य वही था। क्या आपका उस समय उदेश्य पेशेन्ट को ठीक करने का था या सिर्फ सप्लीमेंट बेचने का?

जहाँ तक मैं समझता हूँ कि जो लोग मेरे पास पेशेन्ट लेकर आते हैं, उनका प्रथम उद्देश्य पेशेन्ट को ठीक करना होता है और साथ में सप्लीमेंट भी बिकते हैं, क्योंकि ज़ायरोपैथी सप्लीमेंट के कॉम्बिनेशन पर ही आधारित है। एमवे द्वारा मार्केट किये जाने वाले न्यूट्रीलाइट के सभी सप्लीमेंट गुणवत्ता में अग्रणी है इसमें कोई शंका नहीं है, परन्तु बाकी कंपनियों के सभी सप्लीमेंट अच्छे नहीं हैं यह कहना अनुचित होगा। 25 वर्षों से सप्लीमेंट की दुनिया में काम करने से हमें यह अनुभव मिला है कि अन्य कंपनियों के भी कुछ सप्लीमेंट अद्वितीय हैं।

वैसे तो बहुत से लोग हमें जानते हैं, परन्तु हमारी विचारधारा के बारे में बहुत कम लोंगों को सही जानकारी है। इसलिये आज स्पष्ट करता हूँ। सप्लीमेंट हमारे जीवन में 25 वर्ष पूर्व आये थे, उस समय हिन्दुस्तान में बहुत ही कम लोंगों ने सप्लीमेंट के बारे में सुना था। सप्लीमेंट से हमारा जीवन बदला और अनजाने में एक मुहिम छिड़ गई, लोगों का जीवन बदलने की। मैं भारतीय जलसेना में कमांडर था और नौसेना मुख्यालय, दिल्ली में ज्वॉइन्ट डायरेक्टर के पद पर कार्यरत था। 25 वर्षों से जीवन की सभी सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण जीवन जी रहा था। उस समय दिनचर्या से किसी तरह समय निकाल मैं कुछ पेशेन्ट को सुझाव दे पाता था और कुछ निराश हो लौट जाते थे। समय की कमी के कारण निराश होने वाले पेशेन्ट की संख्या बढ़ती जा रही थी। यह देख एक दिन मन द्रवित हुआ और घर पर बिना किसी को बताये, मैने जनसेवा और मानव कल्याण में बचा हुआ जीवन समर्पित करने के विचार से, नौसेना से प्री-मैच्योर रिटायरमेंट का निर्णय ले लिया। इस बात से घर में सभी स्तब्ध रह गये। सभी को लगा मैं पागल हो गया हूँ, क्योंकि इतनी बड़ी सरकारी नौकरी आज के जमाने में कोई छोड़ने की सोच भी नहीं सकता। मुझे यह एहसास हुआ कि ईश्वर मुझसे कुछ अलग करवाना चाहते हैं।

नौकरी छोड़ने के बाद पेशेन्ट को सलाह देने के साथ एमवे बिजनेस भी करने लगा। जल्दी ही सिल्वर और गोल्ड बन गया। मुझे प्रतिमाह एमवे से एक से डेढ़ लाख की इनकम आने लगी। मैं भी एमवे बिजनेस करना चाहता था। लोगों का मानना था और हमें विश्वास था कि यदि इसी गति से हम चले तो एमवे में एक नया इतिहास लिखा जायेगा।  परन्तु शायद नियति कुछ और थी। ईश्वर हमसे कुछ और करवाना चाह रहा था। एमवे ने हमारी सुझाव देने तथा सेमिनार लेने की प्रक्रिया को कंपनी के नियमों का उल्लंघन बताते हुये कारण बताओ नोटिस भेजा तो हम कुछ समय के लिए परेशान हुये, परन्तु जल्द ही ईश्वर ने मदद की और हमें सद्बुद्धि आई कि कुछ समय पूर्व ही हमनें डेढ़ लाख की स्थायी सरकारी नौकरी जनसेवा और मानव कल्याण के लिए छोड़ी है,  तो क्या डेढ़ लाख की अस्थाई आय के पीछे उस उदेश्य को छोडना उचित होगा?

एमवे बिजनेस वहीं समाप्त हो गया। आज भी हमारे एमवे के एकाउंट में हमारा कमीशन पड़ा हैे।

इसके अतिरिक्त सभी को मालूम है कि  कुछ सप्लीमेंट कई सालों से बंद हैं, जिसके कारण मरीजों को बहुत परेशानी हुई। क्या ऐसी परिस्थिति में कोई और विकल्प ढूँढना गलत है?

सभी को  ज्ञात है कि हिंदुस्तान में 60 से 70 प्रतिशत सप्लीमेंट का विक्रय कहीं ना कहीं हमारी किताबों, ज़ायरो पत्रिका, सेमीनार व कंसल्टेंसी के कारण हो रहा है। पिछले 25 वर्षों के हमारे अथक प्रयास का लाभ उठा रहे लोग, आज हमें लालची होने की दुहाई दे रहे हैं।

ज़ायरोपैथी स्वास्थ्य की एक नई विचारधारा है, जिसमें शुरूआती दौर में लोगों की बीमारियों को सप्लीमेंट के कॉम्बिनेशन से ही ठीक किया जाता था। परन्तु इस क्षेत्र में निरंतर कार्य करने से हमें एक अनुभव मिला कि, फूड सप्लीमेंट के कॉम्बिनेशन से शुरूआती दौर की बीमारियों में तो राहत मिल सकती है, परन्तु क्रॉनिक बीमारियों को ठीक करने के लिये कुछ और भी जोड़ना होगा। इसलिये ज़ायरोपैथी आज विभिन्न प्रकार के हर्बल और औषधीय गुणों वाले वनस्पति के सत्व से तैयार कुछ प्रोडक्ट का उपयोग सप्लीमेंट के साथ कर रही है। परिणामस्वरूप सप्लीमेंट की मात्रा तद्नुसार पहले से कम हो गई है। इसके कारण कुछ डिस्ट्रीब्यूटरों में असंतोष की भावना जागृत हो रही है। परन्तु इस योग से कई बीमारियों में अद्भुत परिणाम आ रहे हैं। इससे तात्कालिक रूप में जो हानि डिस्ट्रीब्यूटरों को होती दिख रही है, वह आगे आने वाले समय में एकदम बिपरीत हो जायेगी। ऐसी ही परिस्थिति पहले भी आई थी जब शुरूआती दौर में पेशेन्ट हमारे पास आते थे। उस समय सप्लीमेंट की मात्रा को लेकर उनके बहुत प्रश्न होते थे। कई बार तो डिस्ट्रीब्यूटर ही कम लिखने का आग्रह करते थे। परन्तु आज परिणाम अच्छे होने के कारण डिस्ट्रीब्यूटरों का कई गुना बिजनेस बढ़ा है। धैर्य रखें आगे आने वाले समय में सभी को मौजूदा परिवर्तन का लाभ भी दिखेगा।

हमारे नजरिये में कोई भी बदलाव नहीं है। पहले भी हम पेशेन्ट के हित की बात कर रहे थे, आज भी वहीं अडिग हैं और भविष्य में भी इसी पर तत्पर रहेंगे। पेशेन्ट हित में हमें जो भी उचित लगेगा, हम वह काम आगे भी करते रहेंगे, यही हमारा संकल्प है।

पिछले एक साल में जबसे हमनें सप्लीमेंट के साथ ज़ायरोपैथी के कुछ प्रोडक्ट जोड़े हैं, तब से सुधार होने वाले पेशेन्ट की संख्या में काफी बढ़त हुई है, इसका साक्ष हमारे पास मौजूद है। इस तथ्य का दूसरा साक्ष है – ज़ायरोपैथी में लोंगों का बढ़ता हुआ विश्वास, क्योंकि पेशेन्ट की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। अतः यह समझ नहीं आता कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि वही लोग जो कल तक ज़ायरोपैथी का गुणगान करते थकते नहीं थे, यहाँ तक कि मंच पर खड़े होकर खुल्लम-खुल्ला ऐलान करते थे, आज ज़ायरोपैथी के विरोध में नारे लगा रहें हैं। परन्तु उन्हें यह नहीं पता कि ज़ायरोपैथी का जन्म निहित मानव कल्याण एवं जनसेवा के लिये हुआ है। आगे आने वाले समय में ज़ायरोपैथी स्वास्थ्य का एकमात्र विकल्प है, अतः इसे रोक पाना संभव नहीं है।

ज़ायरोपैथी – नये ज़माने की स्वास्थ्य समस्याओं का विश्वसनीय उपाय।