ब्रेड

ब्रेड ? खाने से हो सकता है कैंसर!

इस खबर से जनसाधारण सकते में है। सभी स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं। सभी को लग रहा है, जैसे उनके साथ धोखा हुआ है। कुछ ने ब्रेड ? ना खाने का निर्णय ले लिया है, कुछ का कहना है कि यह मैगी जैसा स्टंट है और बचे हुए कहते हैं कि यदि अभी तक नहीं हुआ तो आगे भी खाने में बुराई नहीं है, जो होगा देखा जायेगा। सुबह पार्क में कुछ सीनियर सिटीजन बात कर रहे थे कि अब बर्थ-डे बिना ? केक के कैसे मनेगा?

वास्तविकता तो यह है कि आज अनाज, फल, सब्जियाँ, दूध, घी, खाने की लगभग प्रत्येक वस्तु, हवा, पानी, सूर्य की किरणें, सभी में कैंसर पैदा करने वाले हानिकारक तत्व मौजूद हैं, मैगी और ब्रेड तो सिर्फ बदनाम की गईं हैं।
कैंसर सेल हमारे सभी के शरीर में मौजूद हैं। यदि ये (तेजी से विभाजित होने वाले सेल) ना होते तो दो माइक्रोस्कोपिक सेल 20 सालों में 80 कि ग्रा वजन और 6 फुट का आकार नहीं बना पाते। पूरी ग्रोथ होने के बाद ये सेल समाप्त हो जाते हैं और इनमें से कुछ सेल इमर्जेंसी रिपेयर के लिये प्रतिरोधक क्षमता की निगरानी में रख दिये जाते हैं। हड्डी टूटने या घाव होने पर ये सेल तेजी से मरम्मत हेतु प्रयोग किये जाते हैं और काम होते ही वापस प्रतिरोधक क्षमता की निगरानी में चले जाते हैं। परन्तु खान-पान में मौजूद हानिकारक तत्व हमारी प्रतिरोधक क्षमता को क्षींण बना देते हैं। प्रतिरोधक क्षमता की निगरानी कमजोर पड़ते ही, ये सेल तेजी से विभाजित होने लगते हैं। ऐसी स्थिति को कैंसर कहते हैं।
जब प्रतिरोधक क्षमता को क्षींण करने वाले सेल आज पूरे वातावरण में मौजूद हैं तो सिर्फ मैगी और ब्रेड ? ही क्यों?
चूँकि हम खाना-पीना तो छोड़ नहीं सकते और हमें वही खाना होगा जो बाजार में उपलब्ध हैं। अतः खाने के अलावा प्रतिरोधक क्षमता को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए कुछ अतिरिक्त फूड सप्लीमेंट के रूप में लेना अनिवार्य हो गया है।
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