DHAKKA START GADI

धक्का स्टार्ट गाड़ी

यह सभी जानते हैं कि यदि किसी भी काम में पर्याप्त ताकत ना लगाई जाय तो परिणाम उम्मीद के अनुरूप नहीं होता। इसीलिये यदि किसी बीमारी या शारीरिक समस्या को सप्लीमेंट के कॉम्बिनेशन से ठीक करना है तो पर्याप्त पावर देना आवश्यक है।इस बात को समझाने के लिये, मैं अधिकतर धक्का स्टार्ट गाड़ी का उदाहरण देता हूँ। यदि किसी धक्का स्टार्ट गाड़ी को कम ताकत से धक्का लगाया जाये तो गाड़ी रोल तो करेगी पर कभी स्टार्ट नहीं होगी। इसी प्रकार यदि किसी बीमार को कम पावर के सप्लीमेंट दिये जायेंगे तो उसकी दशा पहले जैसे ही बनी रहेगी और वह कभी भी ठीक नहीं होंगे।

हाल ही में सप्लीमेंट बनाने वाली कुछ कम्पनियों ने अपने सप्लीमेंट की पावर लगभग दस गुना कम कर दी है। इसके कारण जहाँ पहले दो गोलियों में काम बन जाता था, आज 10 से 15 गोलियाँ देनी पड़ती हैं। बहुत से लोग सोचते हैं कि यह डोज अधिक है, परन्तु यह सोच सही नहीं है। क्योंकि यदि सप्लीमेंट की पावर कम होगी, तो पेशेन्ट कभी ठीक नहीं होगा। इसके अलावा 10 से 15 गोलियाँ खाने के लिए पेशेन्ट भी तैयार नहीं होता।

अतः मौजूदा हालात में यह आवश्यक है कि पेशेन्ट को सुझाये हुये सप्लीमेंट की उपयुक्त मात्रा ही दें, ना कि उनके बदले कम पावर के सप्लीमेंट जो असरकारक नहीं हैं। मैंने इस बात का पहले भी जिक्र किया है कि ज़ायरोपैथी में हमारा मुख्य उद्देश्य पेशेन्ट ठीक करना है। हमारा एक बार पुनः सभी से अनुरोध है कि, लोगों की तत्परता से मदद करें, जिससेे ज्यादा से ज्यादा लोग ठीक हों और आगे चलकर आपके सपनें पूरे हो सकें।

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