कोलेस्ट्रॉल

कोलेस्ट्रॉल का षडयंत्र

कुछ दिनों पहले अमेरिका ने पूरी दुनिया को बताया, कि कोलेस्ट्रॉल से आर्टरी ब्लॉक नहीं होती। आज से लगभग 40 वर्ष पूर्व इसी अमेरिका ने पूरी दुनिया को बताया था, कि कोलेस्ट्रॉल से आर्टरी ब्लॉक होती है। यह नासमझी और गलती से नहीं हुआ, यह एक सोचा-समझा षडयंत्र था। चूंकि दुनिया में कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवा तथा रिफाइंड आयल बेचना था।

एन्टी-कोलेस्ट्रॉल दवाओं का सबसे खतरनाक साइड इफेक्ट है – 6 महीने के लगातार प्रयोग से डायबिटीज हो जाना। अनुमानत: विश्व में 30% डायबिटीज रोगी एन्टी-कोलेस्ट्रॉल दवाओं के कारण हैं। भारत में इनकी संख्या दोगुनी हो सकती है, क्योंकि यहां दवा के साइड इफेक्ट बताना डॉक्टर की ड्यूटी में शामिल नहीं है और लोगों की जागरूकता भी बहुत कम है। इसके अलावा अधिकतर भारतीय, डॉक्टर की फीस से बचने के लिये एक बार पर्चा लिखवाकर बार-बार उसी दवा को खरीद कर खाते रहते हैं। एक और बात कि अच्छे-खासे पढे-लिखे और समझदार दिखने वाले लोग भी डॉक्टरों के सामने स्तब्ध रह जाते हैं।

एन्टी-कोलेस्ट्रॉल दवाओं का दूसरा साइड इफेक्ट है – कोलेस्ट्रॉल का कम होना। एन्टी-कोलेस्ट्रॉल दवा कोलेस्ट्रॉल के सभी तत्वों को कम करती है। जिसके फलस्वरूप एल डी एल जिसे साधारणत: बैड कोलेस्ट्रॉल भी कहा जाता है, कम हो जाता है। एल डी एल से को-एन्जाइम क्यू-10 बनता है, जो शरीर के बडे़ अंगों का मुख्य एनर्जी स्रोत है। अतः एल डी एल कम होने से को-एन्जाइम क्यू-10 कम हो जाता है, जिससे हार्ट को कम एनर्जी मिलती है और हार्ट अटैक होने की संभावना बढ़ जाती है।

एन्टी-कोलेस्ट्रॉल का तीसरा और सबसे बड़ा साइड इफेक्ट – कोलेस्ट्रॉल के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ जाना। पिछले 40 वर्षों में लोगों के दिमाग में एक बात कूट-कूट के भर दी गई कि देशी घी और दूध में कोलेस्ट्रॉल भारी मात्रा में पाया जाता है। अतः लोगों ने देशी घी और शुद्ध दूध का प्रयोग बंद कर रिफाइंड तथा टोन्ड/डबल टोन्ड दूध ? का सेवन शुरू कर दिया। फलस्वरूप लोगों की हड्डियाँ कमजोर पड़ने लग गईं और जवानी में ही बुढ़ापा आ गया। दुबले दिखने का फैशन आ गया। हृष्ट-पुष्ट और तंदुरूस्त लोगों को मोटा कहकर चिढ़ाया जाने लगा। लोगों में खाना छोड़ कर शरीर दुबला होने की होड़ लग गई। वेटलॉस और ब्यूटी इंडस्ट्री का जन्म हुआ। शरीर की प्राकृतिक सुंदरता को दरकिनार कर कृत्रिम सुंदरता हाबी होने लगी। लोगों में त्वचा की समस्यायें बढ़ने लगी। इसके अतिरिक्त कामकाज में परिवर्तन से लोगों का धूप में जाना बंद हो गया। शुद्ध घी-दूध तथा शरीर में धूप ना लगने से सभी को विटामिन-डी की कमी होने लगी और इससे जवान होते हिन्दुस्तान की रीढ़ की हड्डी कमजोर पड़ गई है। दवा का एक नया व्यापार शुरू हुआ – कृत्रिम विटामिन-डी का।

पहले हिन्दुस्तान में बढ़ते हुये बच्चों के शरीर को हृष्ट-पुष्ट बनाने के लिये मातायें ज्यादा से ज्यादा घी और दूध का प्रयोग करती थीं। परन्तु आजकल मातायें बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिये – पिज्जा, बर्गर, चिप्स, कुरकुरे, ब्रेड, नूडल्स, पेप्सी-कोक इत्यादि देती हैं।

हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते ही जा रहें हैं। जल्द से जल्द लोंगों को रिफाइंड, टोन्ड व डबल टोन्ड, पिज्जा, बर्गर, चिप्स, कुरकुरे, ब्रेड, नूडल्स, पेप्सी-कोक से बाहर निकल कर शुद्ध घरेलू खान-पान को अपनाना होगा।

हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी। अपनी परंपरा और परिपाटी को समझने के साथ-साथ उस पर विश्वास करना होगा।

ज़ायरोपैथी हिन्दुस्तान में जन्मी एक नई स्वास्थ्य प्रणाली है, जो स्वास्थ्य के प्रति एक नई विचारधारा का संचालन करती है। नज़रिया बदलने के लिये इसका प्रयोग आवश्यक है। आइये इस विचारधारा को सशक्त करने तथा जनजन तक पहुँचाने में हमारी मदद कीजिये।

ज़ायरोपैथी से जुड़ने और अधिक जानकारी के लिए नीचे दिये लिंक को डाउनलोड करें और दूसरों को भी करवायें-

https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.zyropathy&hl=en

वास्तविकता तो यह है कि कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का कारण कोलेस्ट्रॉल का अधिक बनना नहीं है, अपितु इसका कम प्रयोग होना है। इसलिये कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए किसी दवा की जरूरत नहीं है, बल्कि उसके प्रयोग को बढ़ाने की है। इसके लिये आपको अपनी खुराक में अपचित फाइबर बढ़ाने की जरूरत है, जो बहुत आसानी से अनाज के छिलके के रूप में उपलब्ध है, जिसे हम चोकर कहते हैं। अपचित फाइबर को पचाने के लिये जो एन्जाइम लीवर बनाता है वह एल डी एल (बैड कोलेस्ट्रॉल) से बनता है। अतः खाने में मात्र चोकर की मात्रा बढ़ा कर आप सिर्फ एल डी एल (बैड कोलेस्ट्रॉल) को कम करते हैं, जो हानिकारक माना जाता है।