एंटीबायोटिक

एंटीबायोटिक रेसिसटेंट यानि कि एंटीबायोटिक का काम ना करना

पिछले कुछ सालों से यह बात धीरे-धीरे आम होती जा रही है कि, “एंटीबायोटिक काम नहीं कर रहा”। इसका प्रमुख कारण यह बताया जाता है कि, वाइरस म्यूटेशन की प्रक्रिया से स्वयं को अधिक बलशाली बना लेता है, जिससे पूर्व में कारगर एंटीबायोटिक अब काम नहीं कर रहा। इसके लिए नई रिसर्च से और अधिक पावरफुल एंटीबायोटिक बनाने की जरूरत है। सभी इस बात को अक्षरशः मान रहे हैं, क्योंकि यह बात उन व्यक्तियों द्वारा कही जा रही है जिन्हें हमने स्वास्थ्य का ठेकेदार मान लिया है। परन्तु, क्या वे यह बता सकते हैं कि यह नया बलशाली वाइरस सिर्फ उसी व्यक्ति पर क्यों असर डालता है जो बीमार है, बाकी लोगों को क्यों एंटीबायोटिक रेसिसटेंट नहीं बना रहा?

यदि आप ध्यान से आंकलन करेंगे तो यह स्पष्ट हो जायेगा कि जिन्हें भी एंटीबायोटिक रेसिसटेंट बताया जा रहा है, वे लम्बे अंतराल से बीमार हैं और दवायें खा रहे हैं।
हमारे शरीर की मरम्मत तथा रखरखाव की जिम्मेदारी हमारी “प्रतिरोधक क्षमता” यानि कि “इम्यूनिटी” का काम है। इम्यूनिटी को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए विभिन्न प्रकार के विटामिन तथा मिनरल्स की आवश्यकता होती है। वैसे तो पूर्व में इनकी पर्याप्त मात्रा भोजन से ही मिल जाती थी, परन्तु आज के वातावरण में यह मुश्किल हो गया है। इसलिये इस कमी को दूर करने के लिये फूड/डाइटरी सप्लीमेंट अनिवार्य हो गये हैं। लम्बे समय के उपचार से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता क्षींण हो जाती है और शरीर एंटीबायोटिक का प्रयोग करने में अक्षम हो जाता है। इस परिस्थिति को एंटीबायोटिक रेसिसटेंट कहा जाता है।
हमनें कई लोगों की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के बाद यह पाया कि पूर्व में कारगर ना हो रही एंटीबायोटिक काम करना शुरू कर देती है।
यह जानकारी मैं इसलिये प्रेषित कर रहा हूँ, कि तेजी से प्रचारित की जा रही एंटीबायोटिक रेसिसटेंट होने के दबाव में ना आयें और ऐसी परिस्थिति आने पर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने हेतु शीघ्र ज़ायरोपैथी से सम्पर्क करें, जिससेे एंटीबायोटिक रेसिसटेंट व्यक्ति को बचाया जा सके।
“ज़ायरोपैथी”- नये ज़माने की स्वास्थ्य समस्याओं का नया उपाय।