ब्रेन हेमरेज

ब्रेन हेमरेज
आज एक महिला आईं, उनकी उम्र 61 वर्ष थी। उन्होंने बताया कि उन्हें बहुत सालों से अस्थमा और ब्लडप्रेशर है और उसके लिए वे आवश्यकतानुसार नेबुलाइजर/इनहेलर के साथ-साथ बी पी की दवाओं का नियमित सेवन करती हैं।
दो वर्ष पूर्व अचानक उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ, परन्तु भाग्य से लकवे से बच गईं। बी पी बढ़ जाने से उनके ब्रेन की एक नस फट गई थी और वहाँ खून जम गया था। चार दिन आई सी यू में थीं और फिर दवाओं का एक नया सिलसिला शुरू हो गया। अस्थमा, बी पी के साथ ब्रेन हेमरेज की दवा, जिसमें इकोस्प्रिन मुख्य है, जिसका काम है खून को पतला करना तथा एक बीटा ब्लॉकर।
उन्होंने बताया कि जब से ब्रेन हेमरेज हुआ है, उन्हें चक्कर आने लगा है और बहुत ज्यादा कमजोरी लगने लगी है। कभी-कभी उन्हें गर्दन में एवं पसलियों में दर्द भी होता है, जिसका कारण सर्वाइकल है। कुछ महीनों से उनके हाथों में कंपन भी होने लगा है। मैंने कुछ सप्लीमेंट खाने का सुझाव दिया और कहा कि दो महीने बाद धीरे-धीरे आपकी बाकी दवायें बन्द कर देंगे। उन्होंने तुरंत रियेक्ट किया और कहा कि वे ब्रेन की दवायें बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं बंद करेंगी।
मैंने उन्हें समझाया कि ब्रेन के लिए उन्हें सिर्फ इकोस्प्रिन दिया जा रहा है, जो सिर्फ खून पतला करती है। उनके ब्रेन हेमरेज का कारण खून का गाढ़ा होना नहीं था, अपितु नस का फटना था। अतः –
(1) खून पतला करने की क्या जरूरत है?
(2) क्या खून पतला कर भविष्य में ब्रेन हेमरेज की संभावना को कम करना है?
(3) खून पतला होने से ब्रेन हेमरेज में उन्हें क्या लाभ होगा?
चूँकि उनके ब्रेन हेमरेज का कारण  खून का गाढ़ा होना नहीं था, अतः इस केस में खून पतला करने की आवश्यकता ही नहीं थी। उनके ब्रेन हेमरेज का कारण था, नस का फटना। इसका मतलब है कि इनकी नसें कमजोर पड़ गईं हैं और उन्हें नसें मजबूत करने की दवा दी जानी चाहिए थी। परन्तु ऐसा ना कर उन्हें खून पतला करने की दवा दी गई। खून पतला होने से, नसों में खून की रफ्तार बढ़ जायेगी और कमजोर नसों का क्षरण और तेजी से होने लगेगा। इसका तात्पर्य यह हुआ कि खून पतला करने की दवा इनके लिए हानिकारक है ना कि लाभदायक। वास्तविक रूप में उनके हाथों का कंपन और शरीर की थकान इस बात की सूचक हैं कि उनके नर्व सेल कमजोर पड़ रहें हैं, जो इकोस्प्रिन का साइड इफेक्ट है।
चूँकि खून पतला करने से ब्रेन के सेल कमजोर पड़ रहे हैं, अतः भविष्य में ब्रेन हेमरेज की संभावना और बढ़ जाती है।
खून पतला करने से जो भी लाभ उनके शरीर को मिलना था मिल चुका। अब उसके साइड इफेक्ट बढ़ने लगें हैं। यदि उनकी इकोस्प्रिन आगे चलती रही तो निश्चित ही वह समय दूर नहीं जब उन्हें दुबारा ब्रेन हेमरेज होगा और इस बार पहले से अधिक होगा।
अधिकांश डॉक्टर एक बार दवायें लिख देते हैं और पेशेन्ट को जिन्दगी भर खाने को बोलते हैं। पेशेन्ट कभी भी डॉक्टर से पूछने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाता। और यदि किसी ने बात करने की कोशिश भी की तो डॉक्टर यह कह कर डरा देते हैं कि जो चाहो करो, उनकी जिम्मेदारी नहीं होगी। पेशेन्ट डर जाता है और मौत तक सवाल नहीं करता। वास्तव में कोई डॉक्टर किसी बात के लिए कभी भी जिम्मेदार नहीं होता, क्योंकि इस पेशे में लोग हमेशा प्रैक्टिस करते हैं, कभी कन्फर्म नहीं होते।
हमें ऐसा लगता है कि इस प्रकार के बहुत सारे लोग दवाओं के कारण, ऐसी परेशानियों का शिकार हो रहे हैं। बहुत से लोग डॉक्टर द्वारा लिखी दवा को भगवान के प्रसाद कि तरह बिना कोई सवाल किये खा रहें हैं।
समय आ गया है। सभी को जागरूक बनना है। जहाँ कहीं भी हमारी जरूरत हो, तो आप नि:संकोच सम्पर्क करें। हम आपकी अवश्य मदद करेंगे।
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1 Comment on "ब्रेन हेमरेज"

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Suresh kumar mishra
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you are right sir. doctor sirf patients ka internment karta… Read more »