जाँच का सही अवलोकन

जाँच का सही अवलोकन

कुछ दिनों पहले एक महिला आईं। वे बहुत परेशान और घबराई हुई थीं। परेशानी उनके चेहरे पर दिखाई दे रही थी। उनके साथ उनका एक मित्र तथा एक महिला भी थीं, जो दो महीने पहले उन्हें हमारे पास लाई थी। उन्होंने रिपोर्ट टेबल पर रखते हुये, कहा कि दो महीने से आपके द्वारा सुझाई गयी सभी चीजें खाने के बावजूद मेरा फाइब्रायेड बढ़ गया है और गायनकोलाजिस्ट ने तुरन्त आॉपरेशन का सुझाव दिया है।

इस बात पर मैं भी हैरान हुआ। परन्तु मैंने ध्यान से उनकी दोनों रिपोर्ट का अवलोकन किया। मैंने पाया कि उनकी पहली रिपोर्ट में सिर्फ फाइब्रायेड का साइज लिखा था और दूसरी रिपोर्ट में पहले बच्चेदानी का साइज लिखा था और बाद में फाइब्रायेड का साइज लिखा था। मैंने दोनों फाइब्रायेड को कम्पेयर किया तो आश्चर्य में पड़ गया। मैंने उनसे दुबारा पूछा कि आपने इस रिपोर्ट को किसे दिखाया है?

उन्होंने बताया कि वे स्वयं एक पैथोलॉजी लैब में काम करती हैं और यह अल्ट्रासाउंड उनके ही सहकर्मी ने किया है। फाइब्रायेड बढ़ने की बात सबसे पहले उन्होंने ही बताई थी। फिर वही रिपोर्ट उन्होंने जान पहचान के एक गायनकोलाजिस्ट को दिखाया जो उनके लैब से जुड़ी हैं और काफी समय से उनसे परिचित हैं। दोनों का एक ही मत था, कि जल्द से जल्द अॉपरेशन करवा लेना चाहिये। अॉपरेशन के लिये उनके सभी टेस्ट हो चुके हैं और कल उनका अॉपरेशन है।आज आपसे मिलने इनके (उस महिला की ओर इशारा करते हुए कहा, जो उन्हें हमारे पास लायीं थी) कहने पर मात्र आपको बताने के लिये आई हूँ।

मैंने उन्हें मुबारक बाद देते हुये उनके साथ बैठी महिला को धन्यवाद देने को कहा। मेरी बात सुन सभी सकते में आ गये और आश्चर्य से मेरी ओर देखने लगे। मैंने उन्हें बताया कि उनका फाइब्रायेड आधा हो चुका है, वे सुझाई गई सभी चीजें यथावत दो महीने तक और चालू रखे, उसके बाद अल्ट्रासाउंड कर पुनः विचार करेंगे। मैंने उन्हें बताया कि अल्ट्रासाउंड करने वाले सहकर्मी और उनकी गायनकोलाजिस्ट ने बच्चेदानी को फाइब्रायेड समझ अॉपरेशन का सुझाव दिया होगा। रिपोर्ट को पुनः पढ़ने के बाद, सभी के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। उस महिला को खुशी में आँसू निकल आये और उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यह हाल हम लोगों का है, तो बाकियों का क्या होगा?

इस वाकिये के माध्यम से हम आपको यह बताना चाहते हैं कि किसी भी रिपोर्ट पर अंधा विश्वास ना करें। कोई भी रिपोर्ट मिलने के बाद धैर्य से उसका अवलोकन कर समझने का प्रयास करें। यदि परिस्थिति के बिपरीत रिपोर्ट है तो एक और जाँच दूसरी जगह से करवायें और किसी अन्य जानकार से सलाह लें। यदि आवश्यकता समझें तो नि:स्वार्थ और निष्पक्ष सलाह के लिये ज़ायरोपैथी से भी सम्पर्क कर सकते हैं।

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