चिकनगुनिया – जोड़ों और हड्डियों का सबसे बड़ा दुश्मन

चिकनगुनिया – जोड़ों और हड्डियों का सबसे बड़ा दुश्मन

कुछ दिन पहले मेरे पास सेना से सेवानिवृत्त एक व्यक्ति आये। बड़ी कठिनाइयों से वे मेरे आफिस की पहली मंजिल की सीढ़ियाँ चढ़ पाये थे। उन्होंने बताया कि उन्हें छह महीने पहले चिकनगुनिया हुआ था,  बुखार तो ठीक हो गया, पर अब वे विस्तर से नहीं उठ पा रहे। उनके सभी जोड़ो और हड्डियों में भीषण दर्द है। इसके अलावा उन्हें शुगर भी हो गई है। चलने-फिरने में असमर्थ हो गये, उनका किसी काम में मन नहीं लगता, दिन भर कराहते लेटे रहते हैं। उन्हें एक मदर डेयरी का बूथ मिला है, पर उसमें भी बैठ नहीं पाते। कई महीनों से बंद है और यही उनकी आय का एकमात्र स्रोत है। बहुत इलाज करवाया पर कोई फर्क नहीं पड़ा। एक दिन अचानक आपका “केयर वर्ल्ड” टी वी चैनल में प्रोग्राम देखा, आशा की एक किरण दिखाई दी और बहुत हिम्मत जुटाकर आपके पास तक पहुँचा हूँ। मैं बहुत उम्मीद और विश्वास के साथ आपके पास आया हूँ और आप मुझे किसी भी तरह ठीक कर दीजिये।

वास्तव में वे बहुत परेशान थे। वे शारीरिक एवं आर्थिक दोनों परेशानियों से जूझ रहे थे। मैंने उन्हें बताया कि आप पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं, परन्तु सप्लीमेंट मंहगे मिलते हैं।आप कैसे सप्लीमेंट खा पायेंगे? उन्होंने कहा कि यदि मैं ठीक हो गया तो मैं पैसा कमा लूँगा, पर यदि मेरी यही दशा रही तो कुछ नहीं कर पाऊँगा। इसलिये आप ऐसे सप्लीमेंट लिखिये कि मैं जल्दी से जल्दी ठीक होकर अपना काम सम्भाल सकूँ।
मैंने उनकी जरूरत के अनुसार सप्लीमेंट लिख दिये और दो महीने सप्लीमेंट खाकर पुन: आने को बोला। ठीक होने के लिये, उन्हें एक महीने में लगभग बीस हजार के सप्लीमेंट खाने थे। उन्होंने इमानदारी से नियमित रूप से सुझाये हुये सप्लीमेंट खाये, क्योंकि दो महीने बाद जब वे आये, तो परिणाम सामने था। उनके अनुसार वे लगभग 40% स्वस्थ हो चुके थे। अपना काम पुन: करने लगे थे। उनकी रिकवरी के मुताबिक मैंने पुनः दो महीने के सप्लीमेंट लिख दिये। जब वे इस बार आये तो बहुत प्रसन्न थे और साथ में दो और भी पेशेन्ट लाये थे।  उन्होंने बताया कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं, उनकी शुगर पूरी तरह ठीक है और अब उनके शरीर में कोई दर्द नहीं है। लेकिन मेंटेनेंस के लिए वे कुछ सप्लीमेंट खाते रहना चाहते हैं,  जिससे वे भविष्य में स्वस्थ बनें रहें, क्योंकि उनकी उम्र 50 वर्ष की हो चुकी है।

उनकी सोच, समझदारी और जागरूकता ने मुझे हतप्रभ कर दिया। काश! सभी यह समझ पाते कि जिस शरीर का हम प्रयोग कर रहे हैं, उसे भी मेंटेनेंस चाहिये। आजकल जीभ को स्वादिष्ट लगने वाले भोजन में वो तत्व मौजूद नहीं हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने में सक्षम हों। अतः यदि शरीर को स्वस्थ बनाए रखना है तो भोजन के अलावा कुछ और “सप्लीमेंट”  के रूप में देना जरूरी है। बहुत से लोग पौष्टिक आहार खाने का दावा तो करते हैं पर आहार की पौष्टिकता से वाकिफ नहीं हैं।

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