एन्टीबायोटक रेसिसटेंट

एन्टीबायोटिक रेसिसटेंस- एक भ्रमित विचारधारा

कुछ दिनों से हमारे देश में एन्टीबायोटक रेसिसटेंट होने की भ्रांति बहुत तेज़ी से फैलाई जा रही है। यहाँ तक कि यह माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी के भी बहुचर्चित कार्यक्रम – मन की बात का भी विषय बना।

वास्तविकता तो यह है की यह बात पूरी तरह निराधार तथ्यों पर तैयार की गई है। यह कहना कि बैक्टीरिया/वाइरस म्यूटेशन कि प्रक्रिया से स्ट्रॉंग होते जा रहे हैं, इसीलिये एन्टीबायोटक असर नहीं कर रही, यह पूर्णरूपेण ग़लत है। बैक्टीरिया/वाइरस में कोई बदलाव नहीं आया। यदि कोई बदलाव आया है तो मरीज़ की प्रतिरोधक क्षमता पहले के मुक़ाबले दुर्बल/क्षीण हुई है। जिसके फलस्वरूप सिर्फ़ एन्टीबायोटिक्स ही नहीं बल्कि अन्य कोई भी दवा काम नहीं करती। पहले आप जैसे ही हमने भी इनके गुमराह करने वाले विचारों को मान लिया था, परन्तु गहन विचार और प्रयोगात्मक तथ्यों के आधार पर हमें यह पता चला की यह किसी नई साज़िश की नीव है। जिसमें अरबों-ख़बरों का फ़ंड दोहन कर, करोड़ों को मौत के घाट उतार कर, कुछ दशकों बाद कोई नई बात बता देंगे, जिसका हम मूक बनकर अनुशरण करते रहेंगे, जैसा कोलेस्ट्रोल के साथ किया।

एन्टीबायोटक या अन्य किसी भी दवा को शरीर में सुचारू रूप से काम करने के लिये, मात्र प्रतिरोधकक्षमता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है, जिसमें ज़ायरोपैथी सबसे अधिक कारगर है।

यदि आपके आसपास जानकारी में कोई भी व्यक्ति ऐसा है जिस पर एन्टीबायोटिक्स या दवायें बेअसर हो गई हों तो उन्हें ज़ायरोपैथी से सम्पर्क करने की सलाह दें, हो सकता है आपका यह प्रयास उन्हें नया जीवन देने में सफल रहे।

अधिक जानकारी के लिये ज़ायरोपैथी ऐप डाउनलोड करें www.zyropathy.com and write to us on zyropathy@gmail.com या फिर 9910009031/9313741870/9310731871/011-47455435 पर काल करें।

ज़ायरोपैथी – नये ज़माने की स्वास्थ्य समस्याओं का विश्वसनीय उपाय।


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