इलाज

इलाज की वास्तविकता

लगभग पिछले 25 सालों से मैं स्वास्थ्य के इस विषय से जुड़ा हुआ हूँ। 60 हजार से अधिक लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को सुन चुका, उनकी रिपोर्ट देख चुका और अपने अनुभव के आधार पर उन्हें फूड सप्लीमेंट खाने का सुझाव दे चुका। परन्तु, लगभग हर दिन कोई न कोई केस ऐसा आ जाता है, जो नया लगता है।
कल एक व्यक्ति आये जिनकी उम्र 61 वर्ष थी। पेशे से वकील और 10 वर्षों से देश के सबसे प्रसिद्ध सरकारी अस्पताल में इलाज करवा रहे थे। उन्होंने कुर्सी पर बैठते ही यह बताया कि इस इलाज ने उन्हें कंगाल बना दिया है। पिछले 10 वर्षों से उनका काम बंद है और इलाज के खर्च से उनका घर भी बिक गया है। उसके बाद उन्होंने बताया कि 10 साल से बोटाक्स का इंजेक्शन ? लगवा रहे हैं और साथ में गोलियाँ भी खा रहे हैं, परन्तु कोई राहत नहीं मिली। दस वर्षों से लगातार इंजेक्शन ?और गोलियों के सेवन से साइड इफेक्ट के रूप में उन्हें कई अन्य समस्यायें हो गई हैं, जिनसे उनका जीवन और भी निराशाजनक हो गया है।
उनकी अजीब सी समस्या थी। उनकी पलकें स्वत: नीचे गिर जाती थी और उनके गले की नसें निरंतर सूखती एवं कमजोर पड़ती जा रही थीं। अब वे अपनी गर्दन एवं पलकों को सम्भालने में सक्षम नहीं थे। यहाँ तक कि अब  खाना गुटकने में भी तकलीफ हो रही है। यह एक प्रकार की मस्कुलर डिस्ट्राफी है, जिसमें सिर्फ गर्दन एवं चेहरे की नसें निरंतर कमजोर पड़ती जाती हैं।
मेरे बारे में उन्हें विगत चार वर्षों से जानकारी थी, परन्तु आ नहीं पाये। शायद विश्वास की कमी या विधि का विधान।
मैंने उन्हें सप्लीमेंट का कॉम्बिनेशन लिखकर दिया है। मुझे विश्वास है कि यदि वे उस कॉम्बिनेशन को खायेंगे तो एक से डेढ़ साल में वापस अपने काम पर जा सकेंगे। परन्तु उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि अच्छे प्रभावशाली सप्लीमेंट खा पाना संभव नहीं हो पायेगा। ऐसे ही लोगों की मदद के लिए हमनें – “Be Humane Charitable Trust” की कुछ दिन पूर्व में स्थापना की है, जिससे भविष्य में ऐसे लोगों की मदद की जा सके।
पिछले 25 सालों में इस तरह की समस्याओं को देखने, सुनने और समझने के बाद बार-बार मेरे मन में एक सवाल आता है कि, इस तरह की इलाज पद्धति को हम कब तक इलाज मानते रहेंगे?
वास्तविकता पर सभी को गौर करना चाहिये और यदि इस उल्लेख या अापके अपने अनुभव से आपके मन में भी उपरोक्त सवाल उठ रहा हो, तो एक बार ज़ायरोपैथी को अवश्य आजमायें। निश्चित ही आपके विचार ? बदल जायेंगे।
सम्पर्क – www.zyropathy.com
कामायनी नरेश


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