अॉस्टियोपोरैसिस

अॉस्टियोपोरैसिस

अॉस्टियोपोरैसिस- यानि हड्डियों की कमज़ोरी (हड्डियों में भुरभुरापन) के मुख्य कारण हैं – खानपान, कार्य प्रणाली, लाइफ़ स्टाइल में बदलाव।

आज से 50 साल पहले, हिन्दुस्तानियों को यह समस्या नहीं होती थी। क्योंकि वे शुद्ध घी, दूध, दही, छाछ का पर्याप्त सेवन करते थे तथा सूर्य की रोशनी में कसरत और काम करते थे। परन्तु आज हम इनमें से कुछ नहीं करते, बल्कि इनका प्रयोग करने वालों को देहाती कहा जाता है। आज हम कोका कोला, बियर, डिब्बों में भरा केमिकली बनाया पेय, शराब, इत्यादि पीते हैं और रात भर जगते हैं तथा दिन भर सोते हैं। इसके अलावा फ्रिज में रखा भोजन बार- बार गरम कर कई दिन खाते हैं। या फिर फ़ास्ट फ़ूड व होटल से स्वादिष्ट पकवान मँगवा पेट में ठूँस लेते हैं जिनमें पौष्टिकता का भरपूर अभाव होता है। इसके अतिरिक्त फल, सब्ज़ियों और अनाज में अंधाधुँध फर्टीलाइजर, केमिकल और पेस्टीसाइड। दिन में काम करने वाले ए सी के अंदर, दिन में भी बिजली की रोशनी में काम करते हैं। यदि देखा जाय तो सबकुछ – खाना, पानी, हवा और सूर्य की रोशनी रहित काम का स्थान अशुद्ध है। यही मॉडर्न लाइफ़ स्टाइल है। इस तरीक़े के ज़हरीले खानपान और कार्य प्रणाली में कैसे किसी की हड्डियाँ मज़बूत हो सकती हैं।

आज सभी के घुटने, कमर और गर्दन में परेशानियाँ बढ़ रही हैं। यह समस्या औरतों में और भी ज्यादा उनकी अधिक सेडेन्टरी लाइफ़ स्टाइल तथा शारीरिक संरचना के कारण है। इसके अलावा कुछ दवायें (स्टेरॉयेड/इम्यूनो सप्रेसेंट) भी हड्डियों को कमज़ोर करने का काम करती हैं। यदि देखा जाय तो समूचा हिन्दुस्तान धीरे-धीरे घुटनों पर आ गया है और इसका श्रेय पश्चिमी सभ्यता के अनुसरण का परिणाम है।

इसके पहले भी मैंने ‘कोलेस्ट्रॉल षडयंत्र’ के बारे में लिखा था। आज मुझे हिन्दुस्तानियों में बढ़ते हुये अॉस्टियोपोरैसिस का कारण भी उसी षड्यंत्र का एक और एक्सटेंशन लगता है। आज से 50 वर्ष पहले, अमेरिका ने वेजीटेबल ऑयल बेचने के लिये हार्ट की आर्टरी ब्लॉकेज का कारण कोलेस्टरॉल बताया और हिन्दुस्तानियों के खानपान से घी-दूध हटा दिया। फलस्वरूप सभी की आदतें एवं मान्यतायें बदल गई हैं। अब जब अमेरिका ने कह दिया है कि आर्टरी ब्लॉकेज का कारण कोलेस्ट्रॉल नहीं है, फिर भी हिन्दुस्तानियों को घी-दूध का सेवन शुरू करने में 50 वर्ष और लग जायेंगे।

मौजूदा हालात में सभी को धीरे-धीरे शुद्ध घी-दूध का सेवन और कम से कम 20 मिनट सुबह की धूप में सैर करना अनिवार्य होना चाहिये। रात में जागना और दिन में सोना बंद कर, दिन में जागना और रात में सोना शुरू कर देना चाहिये, वरना घुटने, कमर और गरदन की परेशानियों के लिये तैयार हो जाइये।

परन्तु यदि आप किसी भी प्रकार की घुटने, कमर, डिस्क स्लिप, साइटिका, गरदन, सर्वाइकल, अॉस्टियोपोरैसिस इत्यादि परेशानियों से जूझ रहे हैं तो जायरोपैथी आज़मायें । जायरोपैथी एकमात्र ऐसा इलाज है जिसमें इन सभी परेशानियों को नेचुरल सप्लीमेंट्स एवं प्लाँट एक्सट्रैक्ट के कॉम्बिनेशन से रिपेयर किया जाता है।

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